
रिपोर्टर राजकुमार हमीरपुर अखंड भारत
सुमेरपुर हमीरपुर। देशभक्तों की देश के प्रति भूमिका के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि देश की दो महान विभूतियों का देश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रहा है। इनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। गणेश शंकर विद्यार्थी का 26 अक्टूबर 1890 को प्रयागराज में जयनरायन श्रीवास्तव और गोमती देवी के घर जन्म हुआ था। ये उच्च कोटि के पत्रकार और साहित्यकार के साथ ही देशधर्मी भी थे। इन्होंने कानपुर से ही साप्ताहिक पत्रिका प्रताप निकालकर देश को एक दिशा दी। विद्यार्थी जी सांप्रदायिक सद्भाव के समर्थक थे। इसी सिलसिले में साम्प्रदायिक संघर्ष समाप्त कराने के लिये जाने पर वह कानपुर में फंस गये और मुस्लिम समर्थक मानकर 25 मार्च 1931 को उनकी हत्या कर दी गई। किन्तु उनकी सद्भाव की सोच आज भी लोगों के जहन में जिन्दा है। इसी तरह महान क्रांतिकारी मन्मथनाथ गुप्त को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि गुप्त जी जाने माने देशभक्त एवं साहित्यकार थे। उन्होंने लगभग 80 पुस्तकें लिखी। काकोरी केस में वह स्वयं शामिल रहे। इन्हें 14 वर्ष का कठोर कारावास भी मिला। कालांतर में 26 अक्टूबर 2000 को दिल्ली में 92 वर्ष की उम्र में गुप्त जी का निधन हो गया। इस कार्यक्रम में अशोक अवस्थी, सिद्धा, प्रेम, प्रिन्स, रामनरायन सोनकर, विकास, कमलेश कुमार सोनकर, रिचा, बउवा, राहुल प्रजापति आदि शामिल रहे।

